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असली प्राचीन रावण संहिता भाग 1,2,3,4,5 – Ravan Samhita Book/Pustak PDF

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PDF Name: Ravan Samhita Book/Pustak PDF
No. of Pages: 124
PDF Size: 16.7 MB
Language: Hindi
Category: Religion & Spirituality
Source: Drive Files

Ravan Samhita Book/Pustak PDF

देना, बुद्धि का स्तम्भन करना, दही को नष्ट कर देना, पागल बनाना, हाथी-घोड़ा को कुपित कर देना, सर्प एवं मनुष्य को बुला देना, खेती आदि का विनष्ट करना,

दूसरे के ग्राम में प्रवेश करना इसके अतिरिक्त भूतादिकों की सिद्धि, पादुका सिद्धि एवं नेत के अञ्जन आदि की सिद्धि शास्त्रीय रीति से वर्णित है ।

इन्द आल की क्रीड़ा, यक्षिणी मन्त्र साधन, गुटिका बनाना, आकश में गमन करना, मरे हुए को जिलाना इसके अतिरिक्त और भी भयंकर विद्याओं, उनम मन्त्री एवं उत्तम औषधियों तथा गुप्त कार्यों का वर्णन करूंगा।

जो शब्धर जी के कहे हुए उडीश को नहीं जानता वह क्राधित होकर क्या कर सकता है।

यह उष्ट्रीश सन्च सुमेरु पर्वत को हिला देने वाला तथा पृथ्वी को सागर में डबा देने वाला है। यह सन शास्त्र नीच कुरनोत्पत्र को, पापी को. भृर्ण को. भक्ति हीन को, भूख (दरिद्र को), मोह में फंसे हुए को, शंकित चित्त वाले को और विशेष करके निन्दा करने वाले पाणी को कदापि न देना चाहिए।

क्योंकि इनसे उद्दोश तन्त्र की क्रिया नहीं हो सकती है। फिर सिन्दि तथा फल तो दूर रहा। यदि इस विद्या की प्रतिष्ठा एवं अपनी आत्मा की रक्षा चाहे. तो देवता गुरु-‘भक्त, सज्जन, बालक, तपस्वी, युद्ध, उपकारी तथा सुमति वाले विद्वान् के प्राप्त

होने पर ही उन्हें यह विद्या प्रदान करें। इसी में इस शास्त्र की प्रतिष्ठा है। इस तन्न शास्त्र के प्रयोग में तिथि, वार, नक्षत्र बे होम काल कशी आदि का विचार नहीं किया जाता है।

केवल तन्त्र के ही बल से औषधियां सिद्धि प्रधान करने वाली होती है। जिसका साधन करने से क्षण मात्र में ही सिद्धि प्राप्त हो जाती है।

जैसे चन्द्रमा से हीन रात्रि, सूर्य से हीन दिवस तथा राजा से हीन गज्य सुखकर नहीं होता, उसी प्रकार गुरु से हीन मन। भी सुख सथा फल देने वाला नहीं होता है। अत: इसमें गुरु की अत्यन्त आवश्यकता है।

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