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[PDF] कोक शास्त्र रति रहस्य | Kok Shastra Ratirahasya Hindi PDF

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PDF Name: Kok Shastra Ratirahasya Hindi PDF
No. of Pages: 130
PDF Size: 8 MB
Language: Hindi
Category: Religion & Spirituality
Source: Drive Files

कोक शास्त्र रति रहस्य | Kok Shastra Ratirahasya Hindi PDF

प्राचीन कालमें ऐसा ही व्यवहार पा, किसी देशमे आजकल भी थहो व्यवहार देखने में आता है। नव विवाहित बालिका वधू पतिके ग्रह्में वकर कुछ दिनोंतक किसी के सङ्ग भी बात चीत नहीं करती,

कन्या के समान सास के निकट ही रहती है, सासके पासही सोती है, रजोदर्शन से पूर्व पति की शव्या पर नहीं जाती; तथा सास, सुसर की सेवा करती रहती है,

उन के पैर धोने को जल लाना, घर लीपना बर्तन मांजना, हल्दी पीसना, सास के सम्मुख बैठकर भोजन बनाना इत्यादि घर के काम ही करती रहती है।

फिर भोजन बनाने के अनन्तर पति आदि को परोसती है, पतिका वचा हुआ भोजन करती है, सबके वस्र घोकर घूप में सुखा ती है

और फिर मध्यान्ह के समय में शरीर से लगने के कारण शरीर की गर्मी वस्त्रों में संयोजित कर के यथा स्थान में भले प्रकार घर देती है।

ऐसेही वंस्त्रादिको के छोटे छोटे स्पर्श से अङ्कुरित देहका विष पति के शरीर में मिलकर क्रमानुसार उसकी प्रकृति में मिलता हुआ चलाजाता है और फिर किसी प्रकार का विघ्न नहीं करता ।

इसी प्रकार प्रथम थोड़ा थोड़ा कर के अभ्यासहोजाने पर, बढ़े सर्गसे भी अनिष्ट की सम्भावना नहीं होती परन्तु अफीमखाने पालेकी भांति अभ्यस्त पुस्य की ही पुष्टि करती है।

मनुष्य के शरीर की विजली या गर्मी स्वभावसे ही सद्दा इघर उधर छटकती रहती है, किन्तु आलाप गात्र स्पर्श आदि संसर्ग से पाप शामक शरीर का विप उच्त विजली के येग के सङ्क एकके शरीर से इसरे के शरीर में प्रवेश करजाता है, यह “चात्ती प्रायश्चित्त विवेक के” पतित संसर्ग प्रकरणमे छ।गलेय जादि महर्षि गणो ने भली प्रांति समादी है।

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